ख़तरे में तुम्हारी रोज़ की इबादत पड़ जाएगी

ख़तरे में तुम्हारी रोज़ की इबादत पड़ जाएगी,/ मुझसे बात करोगे तो मेरी आदत पड़ जाएगी //

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इकबाल के शेर

खुदी को कर बुलन्द इतना कि हर तकदीर से पहले, खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है। (रजा – इच्छा, तमन्ना, ख्वाहिश) जफा जो इश्क में होती है वह जफा ही नहीं, सितम न हो तो मुहब्बत में कुछ मजा ही नहीं। (जफा – जुल्म) ढूंढता रहता हूं ऐ ‘इकबाल’ अपने आप […]

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Hum kabhi jab dard ke qissey sunaane Lag gaey

हम कभी जब दर्द के किस्से सुनाने लग गए लफ़्ज़ फूलों की तरह ख़ुश्बू लुटाने लग गए बेबसी तेरी इनायत है कि हम भी आजकल अपने आँसू अपने दामन पर बहाने लग गए Hum kabhi jab dard ke qissey sunaane Lag gaey Lafz phoolo’n ki tarah Khushbu Lutaane Lag gaey Bebasi Teri inaayat hai ki […]

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