Ye darvesho’n ki basti hai yaha’n aisa nahi’n hoga

ये दरवेशों कि बस्ती है यहाँ ऐसा नहीं होगा, लिबास-ए-ज़िन्दगी फट जाएगा मैला नहीं होगा ! शेयर बाज़ार की क़ीमत उछलती गिरती रहती है, मगर ये खून-ए-मुफ़लिस है कभी महंगा नहीं होगा ! Ye darvesho’n ki basti hai yaha’n aisa nahi’n hoga, Libaas-e-Zindgi phat jayega maila nahi’n hoga ! Share bazaar ki Qeemat uchalti girti […]

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Siyaast nafrato’n ka Zakhm bharne hi nahi’n deti

सियासत नफ़रतों का ज़ख्म भरने ही नहीं देती, जहाँ भरने पे आता है तो मक्खी बैठ जाती है ! Siyaast nafrato’n ka Zakhm bharne hi nahi’n deti, Jaha’n bharne pe aata hai tou Makkhi baith jaati hai. Shayari by @Munawwar Rana

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Chehron pe tabassum hi, sajane ke liye dekh..

चेहरों पे तबस्सुम ही,सजाने के लिए देख.. कुछ दिल की उदासी को छुपाने के लिए देख.. … मैं जागती आँखों की जुबान बन्द रखूँगा.. आंसू भी न अब मुझको बहाने के लिए देख.. …. मुद्दत से मेरी रूह पे एक बोझ है या रब.. दर हो तो कोई सर को झुकाने के लिए देख.. … […]

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